नींद एक जटिल जैविक प्रक्रिया है जो शरीर के लिए बहत आवश्यक है। जब आप सो रहे होते हैं, तो आप बेहोश होते हैं, लेकिन आपका मस्तिष्क और शरीर के आंतरिक कार्य तब भी सक्रिय होता हैं।

सोते समय आपके शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य होते हैं, जो आपको स्वस्थ रहने और गुणवत्तापूर्ण कार्य करने में मदद करते हैं।

इसलिए जब आपको स्लीप डिसऑर्डर जैसी बीमारी होता है, तो यह मानसिक स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता, सोच और दैनिक कामकाज को प्रभावित कर सकता है।

अनिद्रा और स्लीप एपनिया जैसे नींद न आने की बीमारी, आपके जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें रिश्ते, कार्य दक्ष्यता, सोच, मानसिक स्वास्थ्य, वजन, मधुमेह और हृदय रोग जैसे रोग भी शामिल हैं।

स्लीप डिसऑर्डर क्या हैं

स्लीप डिसऑर्डर या नींद संबंधी विकार ऐसी स्थितियां हैं, जो आपके सामान्य नींद की प्रक्रिया को बदल देता हैं और नियमित रूप से अच्छी नींद लेने की क्षमता को प्रभावित करता है।

यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या या बहुत अधिक तनाव के कारण भी हो सकता है। ज्यादातर लोगों को तनाव, व्यस्त कार्यक्रम और अन्य बाहरी प्रभावों के कारण नींद न आने की समस्या का अनुभव होता है।

लेकिन ,जब ये नियमित रूप से होने लगते हैं और दैनिक जीवन में हस्तक्षेप करते हैं, तो वे नींद की बीमारी के ओर संकेत देते हैं।

Sleep disorder in hindi

नींद न आने की बीमारी के वजह से लोगों को सोने में मुश्किल हो सकती है और पूरे दिन अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है।

नींद की कमी के वजह से शारीरिक ऊर्जा, मनोदशा, एकाग्रता और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकती है।

कुछ मामलों में, नींद संबंधी विकार किसी अन्य चिकित्सा या मानसिक स्वास्थ्य स्थिति का लक्षण भी हो सकते हैं। इन अंदरूनी स्थितिों के उपचार करने के बाद नींद की ये समस्याएं दूर हो जाती हैं।

जब नींद संबंधी विकार किसी अन्य स्थिति के कारण नहीं होते हैं, तो उपचार के लिए आमतौर पर चिकित्सकीय इलाज़ और जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह दी जाती है।

यदि आपको संदेह है कि आपको नींद की बीमारी है, तो तुरंत इसका इलाज करवाना महत्वपूर्ण है। अगर इसका इलाज सही समय पर न किआ जाये तो नींद संबंधी विकारों के नकारात्मक प्रभाव अन्य गंभीर स्वास्थ्य परिणामों को जन्म दे सकते हैं।

स्लीप डिसऑर्डर के लक्षण

नींद की समस्या विभिन्न कारकों के कारण हो सकती है। नींद विकार की गंभीरता और प्रकार के आधार पर लक्षण अलग-अलग होते हैं।

इसके लक्षण तब भी अलग-अलग हो सकते हैं जब नींद संबंधी विकार किसी अन्य स्थिति का परिणाम हों।

हालांकि कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी नींद की समस्या का अंतिम परिणाम, शरीर की नींद और दिन के समय जागने के प्राकृतिक चक्र को बाधित या अतिरंजित करना है।

नींद विकार के सामान्य लक्षण:

  • सोने में कठिनाई: हर रात सोने के लिए नियमित रूप से 30 मिनट से अधिक समय लेना, नींद के दौरान बार-बार जागना और फिर सोने में परेशानी होना, या सुबह जल्दी उठना।
  • सोते समय हिलने-डुलने की असामान्य या अप्रिय इच्छा: खासकर शाम को और ठीक सोने से पहले पैरों या बाहों में झुनझुनी जो उन्हें हिलाने मजबूर करता है।
  • दिन में सोने की तीव्र इच्छा: दिन में नींद आना, बार-बार झपकी लेना, या दिन के गलत समय पर सो जाना।
  • असामान्य श्वास: खर्राटे लेना, हांफना, सोते समय दम घुटने की आवाज करना या सांस लेने में तकलीफ होना या थोड़े समय के लिए सांस बंद हो जाना।
  • सोते समय असामान्य हलचल: नींद के दौरान पैर या हाथ को अक्सर झटके लगते हैं।
  • अचानक मांसपेशियों में कमजोरी :हंसने, गुस्सा करने या डरने पर अचानक मांसपेशियों में कमजोरी।
  • नींद में पक्षाघात या स्लीप पैरालिसिस: ऐसा महसूस होना कि आप जागने के बाद हिल नहीं सकते।
  • चिड़चिड़ापन या चिंता: दैनिक कार्यों को करने में रुचि की कमी, चिंता, बातचीत के दौरान चिड़चिड़ापन की भावना।
  • ध्यान की कमी और खराब प्रदर्शन: किसी भी काम में ठीक से ध्यान नहीं दे पाना और काम की गुणवत्ता काफी कम हो जाना।
  • दिन भर की थकान: बिना कोई शारीरिक मेहनत किए अत्यधिक थकान महसूस होना।
  • डिप्रेशन: बिना किसी कारण के अबासाद या डिप्रेशन से पीड़ित होना।
  • वजन बढ़ना:अनावश्यक रूप से वजन बढ़ना।

स्लीप डिसऑर्डर कितने प्रकार के होते है

नींद के विकार 80 से अधिक प्रकार के होते हैं और कुछ अन्य अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं। निचे कुछ प्रमुख विकारों का बर्णन किआ गया हैं:

अनिद्रा या इन्सोमनिआ (Insomnia)

अनिद्रा एक नींद विकार है जिसमें सोने के लिए या सोए रहने में कठिनाई होती है।

यह तनाव, चिंता, हार्मोन या पाचन समस्याओं के कारण हो सकता है या फिर किसी अन्य स्थिति का लक्षण भी हो सकता है।

अनिद्रा वाले लोगों में निम्न में से एक या अधिक लक्षण दिखाई देते हैं:

  • थकान
  • कम एकाग्रता
  • सोने में कठिनाई
  • मानसिक समस्या
  • नींद अच्छे से न आना
  • सुबह बहुत जल्दी उठना
  • रात में बार-बार जागना और वापस सोने में परेशानी होना

इस नींद न आने की बीमारी के कारण से समग्र स्वास्थ्य, कार्य दक्ष्यता और जीवन की गुणवत्ता प्रभाबित होता है, जो निम्नलिखित समस्याओं का कारण बन सकती है:

  • डिप्रेशन
  • चिड़चिड़ापन
  • ध्यान दने में मुश्किल
  • वजन अपने आप बढ़ना
  • कार्य दक्ष्यता कम हो जाना

दुर्भाग्य से, अनिद्रा बेहद आम बीमारी है, और यह विकार वृद्ध, वयस्कों और महिलाओं में सबसे अधिक मात्रा में पायी जाती है।

लगभग 50% वयस्कों को कभी-कभी अनिद्रा का अनुभव होता है। यह अपने आप हो सकती है या किसी चिकित्सा या कुछ मानसिक स्थितियों के वजह से भी हो सकती है।

अनिद्रा अल्पकालिक हो सकती है या लंबे समय तक रह सकती है,और यह समय के साथ आ और जा भी सकती है।

इन्सोमनिआ आमतौर पर तीन प्रकार के होते है:

1. ट्रांसिएंट इन्सोमनिआ (Transient Insomnia)

अनिद्रा केवल कुछ रातों तक रहती है। यह तनाव, बीमारी, या पर्यावरणीय कारक जैसे लाइट, शोर या अत्यधिक गर्मी के वजह से भी हो सकता है।

2. क्रोनिक इन्सोमनिआ (Chronic Insomnia )

अनिद्रा कम से कम 1 महीने तक नियमित रूप से होती है। यह अवसाद, बहत ज्यादा तनाव और रात में दर्द या बेचैनी जैसे कारकों के कारण हो सकती है।

नींद की समस्या के बारे में विचार (जैसे :”मुझे नींद क्योँ नहीं आ रही है ?”) और ज्यादा सोचने की आदत अनिद्रा के लक्षणों को लम्बा खींचते हैं।

3. इंटरमिटेंट इन्सोमनिआ (Intermittent Insomnia)

यह अनिद्रा समय-समय पर अति जाती रहती है।

स्लीप एप्निया (Sleep Apnea)

स्लीप एपनिया एक संभावित गंभीर नींद विकार है जिसमे नींद के दौरान सांस लेने में रुकावट आती है।

स्लीप एपनिया के कारण नींद के दौरान शरीर को कम ऑक्सीजन मिलती है, जिससे बार-बार सांस लेना बंद हो जाता है। यह आपको रात में अनजाने में जगाने का कारण भी बन सकता है।

यह मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

1. ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea)

यह वायुमार्ग में रुकावट या वायुमार्ग के संकीर्ण होने के कारण होता है।

इनमें खर्राटे लेना, दिन में नींद आना, थकान, नींद के दौरान बेचैनी, सोते समय हांफना और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता जैसी लक्ष्यण शामिल हैं।

2. सेंट्रल स्लीप एपनिया (Central Sleep Apnea)

यह मस्तिष्क और आपकी श्वास को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों के बीच तालमेलकी समस्या है, जिससे मस्तिष्क शरीर को सांस लेने के लिए आदेश देने में विफल हो जाता है।

इससे पीड़ित लोग हवा के लिए हांफते हैं और रात में बार-बार जागते रहते हैं।

पैरासोमनियास (Parasomnias)

पैरासोमनियास में नींद के दौरान असामान्य शारीरिक हलचल और गतिबिधि जैसी लक्ष्यण पाए जाते है। जैसे :

  • कराहना
  • बुरे सपने
  • नींद में चलना
  • नींद में बड़बड़ाना
  • बिस्तर में पेशाब करलेना
  • दांत चबाना या जबड़ा अकड़ना
रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (Restless Leg Syndrome)

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम में पैरों को हिलाने के लिए एक तीव्र,अनूठा प्रकटआग्रह है।

इसमें में पीड़ित पैर हिलाता रहता है। ऐसा करने की इच्छा पैरों में झुनझुनी के कारण होती है।

आराम करते समय यह अनुभूति होती हैआराम करते समय ही पैरों को हिलाने के लिए दिल करता है जैसे बिस्तर पर लेटना, देर तक बैठना आदि।

यह आमतौर पर शाम को होता है, जिससे सो जाना और सोते रहना मुश्किल हो जाता है।

ये लक्षण दिन के दौरान हो सकते हैं, लेकिन ये रात में सबसे प्रभावी होते हैं। यह दिन के समय चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की समस्याओं से जुड़े हो सकता है।

इसका कोई सटीक कारण नहीं है, लेकिन यह अक्सर कुछ स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ा होता है, जिसमें एडीएचडी और पार्किंसंस जैसी बीमारियां शामिल हैं।

नार्कोलेप्सी (Narcolepsy)

नार्कोलेप्सी तंत्रिका संबंधी विकार है जो नींद और जागृत अबस्ता के नियंत्रण को प्रभावित करता है।

इसमेंदिन के समय अनियंत्रित नींद दौर का अनुभव होता है मतलब दिन में अत्यधिक नींद आती है और रुक-रुक कर अति है।

ये अचानक नींद के दौरे दिन के किसी भी समय किसी भी प्रकार की गतिविधि के दौरान हो सकते हैं।

नार्कोलेप्सी के कुछ रोगियों को हंसी या गुस्सा करते वक्त अचानक मांसपेशियों में कमजोरी का अनुभव होता है।

यह विकार स्लीप पैरालिसिस का कारण भी बन सकता है, जो आपको जागने के तुरंत बाद कुछ समय के लिए शारीरिक रूप से हिलने-डुलने में असमर्थ बना सकता है।

नींद की यह समस्या अपने आप हो सकती है, या यह कुछ स्नायविक विकारों जैसे कि मल्टीपल स्केलेरोसिस के कारण भी हो सकती है।

स्लीप डिसऑर्डर का कारण

ऐसी कई शारीरिक स्थितियां, बीमारियां और विकार हैं जो नींद को खराब कर सकते हैं। ज्यादातर मामलों में, नींद संबंधी बिमारियों एक अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या के परिणामस्वरूप सामने आते हैं।

नींद संबंधी विकारों के लक्षण इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं। कुछ संकेत जो नींद की नींद न आने की बीमारी की ओर इशारा करते हैं, वे हैं:

एलर्जी और सांस की समस्या

एलर्जी और श्वसन तंत्र में संक्रमण के कारण रात में सांस लेना मुश्किल हो सकता है।

सर्दी की वजह से नाक से सांस लेने में असमर्थता भी नींद की कठिनाई का कारण बन सकती है।

बारबार पेशाब आना

रात के दौरान बार-बार पेशाब आने से जगाने के कारण आपकी नींद ख़राब हो सकता है।

शरीरि की हॉर्मोन में असंतुलन और मूत्र पथ के रोग इस स्थिति के लिए मुख्य रूप से दायी हैं।

लगातार और पुराने दर्द

लगातार दर्द से सोना बहत मुश्किल होता है,आपके सो जाने के बाद भी यह आपको जगा सकता है।

कुछ मामलों में यह सामने आया हे की, नींद की समस्याों के वजह से भी पुराना दर्द बढ़ सकता है। पुराने दर्द के कुछ सबसे सामान्य कारणों में यह शामिल हैं:

  • वात रोग
  • आंत्र रोग
  • पीठ के दर्द
  • लगातार सिरदर्द
  • हृदय रोग
  • फेफड़ों की बीमारी
  • तंत्रिका विकार
  • मानसिक बीमारियां
  • तनाव और चिंता

तनाव और चिंता अक्सर नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, जिससे सो जाना या सोते रहना मुश्किल हो सकता है।

बुरे सपने, नींद में बात करना या नींद में चलना भी आपकी नींद को ख़राब कर सकते है। और भी कुछ कारक हैं जो आपकी नींद की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • ज्यादा मात्रा में कॉफी और शराब का सेवन करना
  • एक अनियमित दिनचर्या दिनचर्या, और देर रात तक काम करना

स्लीप डिसऑर्डर का निदान कैसे किया जाता है

यदि आपको संदेह है कि आपको नींद की समस्या है, तो अपने स्वास्थ्य बिशेषज्ञं के साथ अपने लक्षणों पर चर्चा करें।

वह एक शारीरिक परीक्षण करेंगे और आपको लक्षणों के बारे में जानकारी देंगे। वे विभिन्न प्रकार परीक्षणों कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

पॉलीसोम्नोग्राफी (Polysomnography)

इसमें सरीर की गतिविधियों, ऑक्सीजन के स्तर और मस्तिष्क के तरंगों का इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रसारित और रिकॉर्ड किया जाता है।

आपका स्लीप स्टडी के दौरान यह सब देखा जाता है :

  • स्वांस दर
  • रक्त चाप
  • मस्तिष्क तरंग में परिवर्तन
  • आँखों की गति

रिकॉर्डिंग डेटा को विश्लेषण, किसी योग्य स्वास्थ्य सेवा बिशेषज्ञं द्वारा किया जाता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि आपको नींद विकार है या नहीं।

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (Electroencephalogram)
  • यह एक परीक्षण है जो मस्तिष्क में इलेक्ट्रिकल तरंगो का आकलन किया जाता है और इस गतिविधि से जुड़ी किसी भी संभावित समस्या का पता लगाया जाता है। यह पॉलीसोम्नोग्राफी का एक हिस्सा है।
  • रात में पॉलीसोम्नोग्राफी के साथ साथ दिन में झपकी लेने की आदत को भी अध्ययन किया जाता है। यह नार्कोलेप्सी का निदान करने में मदद करता है।

आपको आपको नींद की समस्या हे या नहीं ये निर्धारित करने के लिए, आप अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ अपनी नींद के पैटर्न और विशेषताओं पर चर्चा करके पता कर सकते है।

नींद की कई सामान्य समस्याओं का इलाज, व्यवहार संबंधी उपचारों और उचित नींद की स्वच्छता पर ध्यान देकर किया जा सकता है। यदि आपको अपने सोने समस्या के बारे में कोई चिंता है तो अपने डॉक्टर परामर्श लें।

स्लीप डिसऑर्डर का इलाज

नींद संबंधी समस्याओं के लिए उपचार, बीमारी की प्रकार और अंतर्निहित कारण के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में चिकित्सा उपचार और जीवनशैली में बदलाव पर ध्यान दिया जाता है।

जीवन शैली में परिवर्तन

जब जीवनशैली में बदलाव चिकित्सा उपचार के साथ किआ जाये तो यह आपकी नींद की गुणवत्ता को काफी सुधार सकता हैं। जैसे :

  • हर रोज व्यायाम करें
  • सोने से पहले कम पानी पिए
  • घर की तपमात्रा को संतुलित करें
  • हमेसा तनाव और चिंता से दूर रहे
  • शोर,लाइट अदि कम से कम करें
  • तंबाकू,सिगरेट और शराब का सेवन कम करें
  • सोने से पहले कम कार्बोहाइड्रेट वाले स्वल्प भोजन करें
  • अधिक सब्जियां और मछली खाएं, और चीनी का सेवन कम करें
  • खासकर दोपहर या शाम को अपने कैफीन का सेवन को सीमित करें

हर दिन एक ही समय पर बिस्तर पर जाना और जागना भी आपकी नींद की गुणवत्ता को बढ़ा सकता है।

चिकित्सकीय इलाज़

नींद की समस्या के लिए चिकित्सा उपचार में निचे दिए गए कोई भी चीज़ शामिल हो सकते है:

  • नींद की गोलियां
  • मेलाटोनिन की खुराक
  • एलर्जी या ठंड की दवा
  • दांत पीसने की आदत के लिए दंत रक्षक
  • अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या के लिए दवाएं
  • स्लीप एपनिया के लिए ब्रीदिंग डिवाइस या सर्जरी

रात को अच्छी नींद लेने के कुछ उपाय

  • यह सुनिश्चित करें कि आपका बेडरूम का वातावरण नींद के लिए अनुकूल हो यानि आरामदायक, ठंडा, शांत और अंधेरा हो।
  • अगर आप शोर से जाग जाते हें तो इयरप्लग का इस्तेमाल करें । यदि रोशनी से आपकी नींद ख़राब होती है, तो स्लीप मास्क या ब्लैकआउट पर्दे का इस्तेमाल करें।
  • दिन में झपकी लेने से बचें। अगर आपको बहुत ज्यादा नींद अति है तो एक झपकी ले लें, लेकिन झपकी को 30 मिनट से कम रखें और दोपहर 3 बजे के बाद झपकी न ले।
  • हमेसा सकारात्मक सोचें । नकारात्मक सोच के साथ बिस्तर पर जाने से बचें।
  • अगर आपको सोने में परेशानी होती है तो नियमित रूप से व्यायाम करें, लेकिन सोने के चार घंटे के भीतर नहीं।
  • सोने अलावा किसी और किसी भी चीज के लिए अपने बिस्तर का इस्तेमाल न करें। सोने से पहले टेलीविशन, मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल न करें।
  • सोने से कम से कम चार घंटे पहले कॉफी, चाय, सोडा, चॉकलेट और भारी भोजन से बचें। दूध, दही जैसे हल्के कार्बोहाइड्रेट स्नैक्स आप खा सकते है।
  • यदि आप चिंता करते हैं या रात में बिस्तर पर बहुत अधिक सोचते हैं तो अपने काम की चीजों को लिख कर या टू-डू लिस्ट बनाकर अपने दिमाग को साफ करें।
  • सोने से पहले स्लीप म्यूजिक सुन सकते है, या किताब पढ़ सकते हैं।
  • सोने से कम से कम चार घंटे पहले और रात के दौरान शराब और तंबाकू लेने से बचें।

कितनी नींद की ज़रूरत होती है

एक व्यक्ति को कितनी नींद की जरूरत होती है यह उसकी उम्र सहित कई और चीजों पर निर्भर करता है। सामान्य रूप से देखा जाये तो :

उम्रनींद की अवधि
0 से 3 महीने की बच्चे14 से 17 घंटे
4 से 11 महीने की बच्चे 12 से 15 घंटे
1 से 2 साल की उम्र11 से 14 घंटे
3 से 5 साल की उम्र 10 से 13 घंटे
6 से 13 साल की उम्र 9 से 11 घंटे
14 से 17 साल की उम्र 8 से 10 घंटे
18 से 64 साल की उम्र 7 से 9 घंटे
65 से अधिक उम्र 7 से 9 घंटे

गर्भावस्था के पहले 3 महीनों में महिलाओं को अक्सर सामान्य से कई घंटे अधिक नींद की आवश्यकता होती है।

सन्दर्भ

सोने की बीमारी के प्रभाव इतने दर्दनाक हो सकते हैं कि आप शायद तत्काल इलाज की जरुरत पड़ सकती है । दुर्भाग्य से, कुछ मामलों इससे छुटकारा पाने के लिए जरुरत से थोड़ा अधिक समय लग सकता है।

हालांकि, यदि आप अपनी उपचार योजना पर कायम रहते हैं और नियमित रूप से अपने चिकित्सक से परामर्श लेते रहते हैं, तो आप अपनी नींद की गुणबत्ता को सुधार सकते है।

स्लीप डिसऑर्डर के इलाज के समय अलग-अलग होता है, और यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपको किस प्रकार का स्लीप डिसऑर्डर है। उपचारों को ध्यान में रखते हुए, अपने डॉक्टर के साथ इलाज के समय सिमा पर बात कर सकते है।

Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. अच्छी नींद आने के लिए घरेलू उपाय

1. यह सुनिश्चित करें कि आपका बेडरूम का वातावरण नींद के लिए अनुकूल हो यानि आरामदायक, ठंडा, शांत और अंधेरा हो।

2. अगर आप शोर से जाग जाते हें तो इयरप्लग का इस्तेमाल करें । यदि रोशनी से आपकी नींद ख़राब होती है, तो स्लीप मास्क या ब्लैकआउट पर्दे का इस्तेमाल करें।

3. दिन में झपकी लेने से बचें। अगर आपको बहुत ज्यादा नींद अति है तो एक झपकी ले लें, लेकिन झपकी को 30 मिनट से कम रखें और दोपहर 3 बजे के बाद झपकी न ले।

4. हमेसा सकारात्मक सोचें । नकारात्मक सोच के साथ बिस्तर पर जाने से बचें।

5. अगर आपको सोने में परेशानी होती है तो नियमित रूप से व्यायाम करें, लेकिन सोने के चार घंटे के भीतर नहीं।

6. सोने अलावा किसी और किसी भी चीज के लिए अपने बिस्तर का इस्तेमाल न करें। सोने से पहले टेलीविशन, मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल न करें।

7. सोने से कम से कम चार घंटे पहले कॉफी, चाय, सोडा, चॉकलेट और भारी भोजन से बचें। दूध, दही जैसे हल्के कार्बोहाइड्रेट स्नैक्स आप खा सकते है।

8. यदि आप चिंता करते हैं या रात में बिस्तर पर बहुत अधिक सोचते हैं तो अपने काम की चीजों को लिख कर या टू-डू लिस्ट बनाकर अपने दिमाग को साफ करें।

Q2. नींद ना आना कौन सी बीमारी है?

1. अनिद्रा या इन्सोमनिआ एक नींद विकार है जिसमें सोने के लिए या सोए रहने में कठिनाई होती है। यह तनाव, चिंता, हार्मोन या पाचन समस्याओं के कारण हो सकता है या फिर किसी अन्य स्थिति का लक्षण भी हो सकता है।

2. स्लीप एपनिया एक संभावित गंभीर नींद विकार है जिसमे नींद के दौरान सांस लेने में रुकावट आती है। स्लीप एपनिया के कारण नींद के दौरान शरीर को कम ऑक्सीजन मिलती है, जिससे बार-बार सांस लेना बंद हो जाता है। यह आपको रात में अनजाने में जगाने का कारण भी बन सकता है।

3. रेस्टलेस लेग सिंड्रोम में पैरों को हिलाने के लिए एक तीव्र,अनूठा प्रकटआग्रह है।इसमें में पीड़ित पैर हिलाता रहता है। ऐसा करने की इच्छा पैरों में झुनझुनी के कारण होती है। आराम करते समय यह अनुभूति होती हैआराम करते समय ही पैरों को हिलाने के लिए दिल करता है जैसे बिस्तर पर लेटना, देर तक बैठना आदि।

Q3. नींद की बीमारी के लिए जिम्मेदार कारक

नींद की बीमारी के लिए जिम्मेदार कारक :

एलर्जी और सांस की समस्या
एलर्जी और श्वसन तंत्र में संक्रमण के कारण रात में सांस लेना मुश्किल हो सकता है। सर्दी की वजह से नाक से सांस लेने में असमर्थता भी नींद की कठिनाई का कारण बन सकती है।

बारबार पेशाब आना

रात के दौरान बार-बार पेशाब आने से जगाने के कारण आपकी नींद ख़राब हो सकता है। शरीरि की हॉर्मोन में असंतुलन और मूत्र पथ के रोग इस स्थिति के लिए मुख्य रूप से दायी हैं।

लगातार और पुराने दर्द
लगातार दर्द से सोना बहत मुश्किल होता है,आपके सो जाने के बाद भी यह आपको जगा सकता है।कुछ मामलों में यह सामने आया हे की, नींद की समस्याों के वजह से भी पुराना दर्द बढ़ सकता है। पुराने दर्द के कुछ सबसे सामान्य कारणों में यह शामिल हैं: वात रोग, आंत्र रोग, पीठ के दर्द, लगातार सिरदर्द, हृदय रोग

Q4. नींद न आने की बीमारी का इलाज

नींद संबंधी समस्याओं के लिए उपचार, बीमारी की प्रकार और अंतर्निहित कारण के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में चिकित्सा उपचार और जीवनशैली में बदलाव पर ध्यान दिया जाता है।

जीवन शैली में परिवर्तन

जब जीवनशैली में बदलाव चिकित्सा उपचार के साथ किआ जाये तो यह आपकी नींद की गुणवत्ता को काफी सुधार सकता हैं। जैसे : हर रोज व्यायाम करें, सोने से पहले कम, पानी पिए, घर की तपमात्रा को संतुलित करें, हमेसा तनाव और चिंता से दूर रहना अदि।

चिकित्सकीय इलाज़

नींद की समस्या के लिए चिकित्सा उपचार में निचे दिए गए कोई भी चीज़ शामिल हो सकते है: नींद की गोलियां, मेलाटोनिन की खुराक, एलर्जी या ठंड की दवा, दांत पीसने की आदत के लिए दंत रक्षक, अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या के लिए दवाएं, स्लीप एपनिया के लिए ब्रीदिंग डिवाइस या सर्जरी

Q5. अगर रात में नींद न आये तो क्या करे?

पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका बेडरूम का वातावरण नींद के लिए अनुकूल हो यानि आरामदायक, ठंडा, शांत और अंधेरा हो। अगर आप शोर से जाग जाते हें तो इयरप्लग का इस्तेमाल करें ।

यदि रोशनी से आपकी नींद ख़राब होती है, तो स्लीप मास्क या ब्लैकआउट पर्दे का इस्तेमाल करें। अगर आपको सोने में परेशानी होती है तो नियमित रूप से व्यायाम करें, लेकिन सोने के चार घंटे के भीतर नहीं।सोने से कम से कम चार घंटे पहले कॉफी, चाय, सोडा, चॉकलेट और भारी भोजन से बचें। दूध, दही जैसे हल्के कार्बोहाइड्रेट स्नैक्स आप खा सकते है।

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