अवसाद या डिप्रेशन और कुछ नहीं बल्कि एक मानसिक विकार है। उसमें उदासी, रुचि या सुख की हानि और क्रोधित होना, दैनिक जीवन को शीघ्र प्रभावित करता है।

उदासी या बुरा लगना सामान्य है और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन अगर यह लंबे समय तक बना रहे तो यह डिप्रेशन का लक्षण है।

लोगों में डिप्रेशन अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है। यह आपके दैनिक जीवन को प्रभावित करने के साथ-साथ आपके समय और उत्पादक क्षमता को भी कम करता है।

डिप्रेशन रिश्तों के साथ-साथ सेहत को भी प्रभावित करता है। इसके वजह से कई सारि बीमारी हो सकते है ।

  • दमा
  • मोटापा
  • मधुमेह
  • वात रोग
  • हृदय रोग

आज के दौर में डिप्रेशन बहुत बढ़ गया है। अवसाद एक बहुत ही गंभीर बीमारी है जो उचित उपचार के बिना और भी गंभीर स्तिथि में जा सकती है।

अवसाद के लक्षण कम से कम 2 हप्ते तक दिखाई दे सकते हैं, और कुछ हफ्तों, कुछ महीनों और यहां तक कि कुछ वर्षों तक भी रह सकते हैं।

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डिप्रेशन के लक्षण क्या हैं

Depression in hindi

उदासी की निरंतर भावना के साथ डिप्रेशन एक बहुत ही अलग मानसिक स्थिति की विशेषता है।

गंभीर डिप्रेशन की स्थिति में कई लक्षण दिखाई देते हैं। उनमें से कुछ आपकी मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं और कुछ आपके शरीर को प्रभावित करते हैं।

ऐसा नहीं है कि ये लक्षण हमेशा दिखाई देते हैं, ये लक्षण आते-जाते रहते हैं। डिप्रेशन के लक्षण पुरुषों, महिलाओं और बच्चों में में अलग-अलग तरीकों से देखे जा सकते हैं ।

पुरुषो में डिप्रेशन के लक्षण

  • नींद :- अत्यधिक नींद आना या रात को नींद न आना, अनिद्रा, बेचैन नींद
  • ब्यबहार :- अत्यधिक शराब पीना, नशीली दवाओं का उपयोग करना, रुचि की हानि, पसंदीदा काम में बोरियत मेहसूस होना, आसानी से थकान महसूस करना, आत्महत्या के विचार आना, उच्च जोखिम वाली गतिविधियों में संलग्न होना
  • शारीरिक :- थकान, पाचन संबंधी समस्याएं, दर्द, सिरदर्द
  • मानसिक :- चिंता, बेचैनी, खालीपन, क्रोध, आक्रामकता, चिड़चिड़ापन, उदास और निराशाजनक महसूस करना
  • यौन रुचि :- कम यौन इच्छा, यौन प्रदर्शन की कमी
  • कार्यादाक्ष्यता :- कार्यों को पूरा करने में कठिनाई, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता, बातचीत के दौरान प्रतिक्रिया में देरी

महिलाओ में डिप्रेशन के लक्षण

  • नींद :- जल्दी जागना, रात में सोने में कठिनाई, बहुत अधिक सोना
  • ब्यबहार :- सामाजिक व्यस्तताओं से हटना, आत्महत्या के विचार आना पसंदीदा काम में रुचि का कम होना,
  • शारीरिक :- दर्द, अधिक थकान, भूख में परिवर्तन, वजन में परिवर्तन, ऊर्जा में कमी, सिरदर्द, ऐंठन में वृद्धि
  • मानसिक :- खाली या उदास महसूस करना, चिड़चिड़ापन, चिंतित या निराश होना
  • कार्यादाक्ष्यता :- अधिक धीरे-धीरे सोचना या बोलना

बच्चो में डिप्रेशन के लक्षण

  • नींद :- सोने में कठिनाई या बहुत अधिक सोना
  • ब्यबहार :- मौत या आत्महत्या के विचार आना, स्कूल में परेशानी में पड़ना या स्कूल जाने से मना करना, दोस्तों या भाई-बहनों से बचना,
  • शारीरिक :- पाचन संबंधी समस्याएं, भूख में बदलाव,ऊर्जा की कमी, वजन कम होना या बढ़ना
  • मानसिक :- चिड़चिड़ापन, क्रोध, रोना, अक्षमता की भावना या निराशा, तीव्र उदासी
  • कार्यादाक्ष्यता :- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, स्कूल के प्रदर्शन में गिरावट

डिप्रेशन के कारण क्या हैं

मेडिकल कम्युनिटी आज तक डिप्रेशन का कोई सठिक कारण नहीं ढूढ़ पाया है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व और पारिवारिक इतिहास पर निर्भर करता है।

डिप्रेशन आपके जीन (Gene) के कारण भी हो सकता है और आसपास की स्थिति के वजह से भी हो सकता है।

डिप्रेशन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे

  • आनुवंशिक विशेषताएं : अगर आपकी परिवार में किसी का डिप्रेशन था या किसी अलग तरह के मानसिक बीमारी थी तो आपको भी डिप्रेशन होने की खतरा बढ़ जाता है ।
  • मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारक :- यह बचपन में हुए किसी तनावपूर्ण स्थिति या डर के कारण भी हो सकता है।
  • अतिरिक्त स्वास्थ्य स्थितियां :- बाइपोलर डिसऑर्डर, अनिद्रा, पुरानी बीमारी या दर्द आदि शारीरिक स्थितियों के वजह से भी अवसाद हो सकता है।
  • वातावरणीय कारक :- ड्रग्स और अल्कोहल (Drugs & Alcohol) का ज्यादा मात्रा में सेवन भी डिप्रेशन का एक मुख्य कारण बन सकता है।
  • मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर स्तरों में परिवर्तन :- दिमाग में फ्रंटल लोब का कम सक्रिय होना एक कारण हो सकता है।

ऐसे कई कारक हैं जो अवसाद को बढ़ा सकते हैं। भले ही यह पूरी तरह से न हो लेकिन अवसाद का कारण अक्सर स्वास्थ्य के अन्य तत्वों से जुड़ा होता है।

डिडिप्रेशन कितने प्रकार होते है

डिप्रेशन को अलग-अलग लक्षण के आधार पर विभक्त किया गया है ।

कुछ लोग लक्षणों का अनुभव केवल संक्षिप्त और अस्थायी रूप से करते हैं, और कुछ लोग इससे गंभीर और स्थायी रूप से पीड़ित होते हैं।

डिप्रेशन कई तरह के होते हैं। नीचे कुछ सबसे सामान्य प्रकार के अवसाद दिए गए हैं।

1. मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर

यहाँ अवसाद की बहुत गंभीर स्थितियों में से एक है। इसमें पीड़ित ब्यक्तिको लगातार उदासीनता, निराशा और बेकार की भावनाएँ आती रहती हैं।

ये मानसिक भावनाएँ महीनों या वर्षों तक लगातार चलती रहती हैं और अपने आप ठीक नहीं होती हैं।

वह उस काम में भी रुचि खो देता है जिसका वह पहले आनंद लेता था।

इस प्रकार के अवसाद में से आपको 2 हफ्तोंकी अवधि में निचे दिए गए लक्ष्यण में से कम से कम 5 लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • दिन में अधिकतम के समय उदास महसूस करना
  • कम सोना या बहुत ज्यादा सोना
  • अधिकांश नियमित गतिविधियों में रूचि कम हो जाना
  • थकान या काम ऊर्जा का महसूस होना
  • वजन अत्यधिक मात्रा से कम हो जाना या बढ़ जाना
  • बहुत धीरे-धीरे सोचना या गतिविधियों में धीमा पन
  • बेकार की भावना या अपराध बोध की भावना
  • एकाग्रता और नियंत्रण में हानि
  • मृत्यु या आत्महत्या का विचार आना

2. परसिस्टेंट डिप्रेसिव डिसऑर्डर

इसे डायस्टीमिया (Dysthymia) के नाम से भी जाना जाता है। इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं लेकिन यह बहुत लंबे समय तक चलते हैं।

शोध से पता चला है कि इसके लक्षण कम से कम 2 साल तक रहते हैं।

यह आपकी जीवनशैली को किसी भी अन्य अवसाद से अधिक प्रभावित करता है क्योंकि यह यहां बहुत लंबे समय तक रहता है।

यह लक्षण किसी ऐसे व्यक्ति में दिखना आम है जो इस मानसिक बीमारी से पीड़ित है। इसके लक्ष्यण है

  • कार्यदक्षता घट जाती है
  • निराशाजनक महसूस होता है
  • खुद पर कॉन्फिडेंस कम हो जाता है
  • दैनंदिन जीवन में आग्रह खत्म हो जाती है

3. बाइपोलर डिसऑर्डर

बाइपोलर डिसऑर्डर मैं पीड़ित व्यक्ति का मानसिक स्तिति अपने आप बदलता रहता है। इसमें पीड़ित को कभी उच्च ऊर्जा तो कभी कम ऊर्जा का अनुभव होता है।

दिन में कई बार ऐसा होता है जब उस व्यक्ति को अच्छा लगेगा और कई बार ऐसा भी होगा जब उस व्यक्ति को बुरा लगेगा और यह सिलसिला चलता ही रहेगा।

बाइपोलर डिसऑर्डर-1 में सिर्फ हाई एनर्जी महसूस होती है, इसमें डिप्रेशन का नमो निसान दिखाई नहीं देता है ।

बाइपोलर डिसऑर्डर में दिखने वाले कुछ लक्षण

  • आत्मघाती विचार आना
  • ज्यादा सोना या कम सोना
  • अचानक वजन बढ़ना या कम होना
  • अधिक भूख लगना या कम भूख लगना
  • उदास, चिंतित और खाली महसूस करना
  • पुरानी बातों को ठीक से याद न कर पाना
  • रोजमर्रा की जिंदगी में आग्रह का नुकसान

4. मनोविकृति अवसाद

जो लोग मेजर डिप्रेशन से पीड़ित होते हैं उनमें अक्सर एक अलग प्रकार के डिप्रेशन के लक्षण भी होते हैं जिन्हें साइकोसिस डिप्रेशन कहा जाता है।

जब ये दोनों स्थितियां एक साथ प्रकट होती हैं, तो इसे डिप्रेसिव साइकोसिस या अवसादग्रस्तता मनोविकृति कहा जाता है।

साइकोसिस से पीड़ित व्यक्ति को मानसिक भ्रम होता है। जो सुनाई देता है या दिखाई देता है वह वास्तविक नहीं लगता है ।

इनमें से ज्यादातर लोग उदासी, खालीपन और चिड़चिड़ापन जैसी स्थितियों को महसूस करते हैं।

इन दोनों मानसिक बीमारियों का एक साथ आना काफी खतरनाक साबित हो सकता है, जिससे व्यक्ति आत्महत्या करने और अनावश्यक जोखिम लेने से घबराता नहीं है।

इन दोनों बीमारियों के एक साथ आने का कोई सटीक कारण नहीं है लेकिन इसका इलाज इलेक्ट्रोकोनवल्सिव थेरेपी (ECT) द्वारा संभव है।

5. प्रेग्नेंसी में डिप्रेशन

गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं में डिप्रेशन पाया जाता है और इसका कोई एक कारण नहीं होता है और यह डिप्रेशन महीनों और सालों तक बना रह सकता है।

गर्भावस्था के दौरान या बाद में शरीर में हार्मोन लेबल में बदलाव के कारण होने वाले अवसाद को पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है।

इसके कई लक्षण हो सकते हैं जैसे

  • चिंता
  • सोने में समस्या
  • हमेशा उदास लगना
  • खालीपन महसूस होना
  • भूख और खाने में बदलाव
  • आत्महत्या की भाबना आना

इसका इलाज केवल टॉक थेरेपी और प्राकृतिक उपचार के माध्यम से किया जाता है ।

उस दौरान कई महिलाएं एंटीडिप्रेसेंट लेती हैं लेकिन यह तरीका सुरक्षित हे या नहीं, यह आपको डॉक्टर ही बता सकते हैं ।

कोई भी एंटीडिप्रेसेंट दवा लेने से पहले अपने हेल्थ केयर प्रोफेशनल से बात करें ।

यह नई बने हुए माँ के लिए काफी चिंता का विषय है और डिप्रेशन के लक्षण नजर आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ।

6. मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर विथ सीजनल पैटर्न

यह डिप्रेशन (Major depressive disorder with seasonal patterns) तब होता है जब आपके शरीर को कम धूप मिलती है और यह ज्यादातर सर्दियों के दौरान देखा जाता है।

यह उन लोगों में अधिक पाया जाता है जो किसी देश या क्षेत्र में अधिक ठंड के साथ रहते हैं।

इसका एक बहुत ही सामान्य और आसान इलाज लाइट थेरेपी है।

डिप्रेशन को टेस्ट कैसे करें

अवसाद का परीक्षण करने का कोई एक तरीका नहीं है। मनोचिकित्सक लक्षणों और मानसिक अवस्थाओं के बारे में प्रश्न पूछकर इसका पता लगाते हैं।

आमतौर पर मनोचिकित्सक आपसे इन स्थितियों के बारे में पूछते हैं: –

  • नींद
  • भूख
  • कार्य कुशलता
  • मनोदशा और विचार

अवसाद अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ा हुआ है। इसमें आपका रक्त परीक्षण या ब्लड टेस्ट भी किया जा सकता है।

थायराइड की समस्या और विटामिन-डी की कमी से भी डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देते हैं।

डिप्रेशन को नजरअंदाज करना ठीक नहीं होगा। अगर आपकी मानसिक स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है और दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है तो आपको मनोचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ।

  • अकेलापन
  • शारीरिक पीड़ा
  • रिश्ते में समस्या
  • वजन बढ़ना या कम होना
  • आत्महत्या की चिंता और आत्म-नुकसान

डिप्रेशन एक बहुत ही गंभीर मानसिक बीमारी है जो कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बनती है, जैसे :

अगर किसी व्यक्ति को डिप्रेशन के लक्षण दिखाई देते तो उन्हें किसी हेल्थ प्रोफेशनल से अपना इलाज करवाना चाहिए।

एक अच्छा स्वास्थ्य पेशेवर या हेल्थ प्रोफेशनल विभिन्न लक्षणों को कम करने और उनका प्रभावी और सुरक्षित इलाज करने में मदद कर सकता है।

क्या डिप्रेशन का इलाज है

डिप्रेशन के साथ सामान्य जीवन जीना बहुत मुश्किल है लेकिन इसका इलाज आपको एक अच्छी जिंदगी दे सकता है।

आप इसका एक तरह से इलाज करवा सकते हैं या किसी अन्य उपचार की कोशिश कर सकते हैं जो आपके लिए सबसे अच्छा काम करे।

डिप्रेशन का इलाज किया जा सकता है और इसके लिए इन सभी चीजों की जरूरत होती है :

1. मनोचिकित्सा या साइकोथेरपि

इसमें पीड़ित को किसी मनोचिकित्सक से बात कर अपनी भावनाओं को बताना होता है।

मनोचिकित्सा आपको सिखाती है कि अपने बुरे विचारों से कैसे निपटें, इसमें समूह चिकित्सा और पारिवारिक चिकित्सा भी शामिल हैं।

2. दवा का इस्तमाल

इसमें हेल्थ प्रोफेशनल निम्नलिखित दवाएं निर्धारित करता है।

  • एंटी एंजायटी (Antianxiety)
  • एंटीडिप्रेसेंट (Antidepressants)
  • एंटीसाइकॉटिक मेडिकेशन (Antipsychotic Medications)

इसमें पीड़ित को हेल्थ प्रोफेशनल द्वारा दी गई इन दवाओं का सेवन करना होता है, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि इन सभी उपचारों के कुछ दुष्प्रभाव भी होते हैं।

3. लाइट थेरेपी

लाइट थेरेपी, मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर विथ सीजनल पैटर्न (Major depressive disorder with seasonal patterns) के लिए आमतौर पर व्यवहार किया जाता है ।

इसमें डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को सफेद रोशनी के सामने रखा जाता है, जिससे उसकी मानसिक स्थिति में सुधार होता है, डिप्रेशन के लक्षण कम होने लगते हैं।

4. शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहना

बहुत अधिक शराब पीना या ड्रग्स का सेवन करना कुछ समय के लिए अच्छा लगता है, लेकिन लंबे समय तक इसका सेवन करने से डिप्रेशन बढ़ सकता है।

5. अपना खयाल रखना और व्यायाम करना

अपना खयाल रखना भी आपको डिप्रेशन में मदद कर सकता है ।

अच्छी नींद लेना, अच्छा खाना खाना, बुरे लोगों की संगति से बचना और कुछ अच्छे कामों में हिस्सा लेना आपको अच्छा जीवन दे सकता है।

हफ्ते में 3 से 5 दिन के लिए कम से कम 30 से 45 मिनट तक व्यायाम करनी चाहिए ।

व्यायाम करने से एंडोर्फिन नामक हार्मोन निकलता है जो मानसिक स्थिति में सुधार करता है, और अवसाद को कम करने में मदद करता है।

6. सीमा निर्धारित करना

किसी भी काम को जरूरत से ज्यादा मात्रा में करने से डिप्रेशन और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

इसलिए आपको अपने पेशेवर जीवन और निजी जीवन में एक सीमा तय करनी होगी ताकि आप अच्छा महसूस करें।

पर्सनल लाइफ में प्रोफेशनल काम करना सही नहीं है क्योंकि इससे आपके दिमाग पर काफी दबाव पड़ता है।

7. वैकल्पिक चिकित्सा

इसमें हेल्थ केयर प्रोफेशनल एक्यूपंक्चर (acupuncture) और ध्यान की सलाह देते हैं, साथ ही उपचार के लिए कुछ जड़ीबूटी का उपयोग करते हैं।

सप्लीमेंट्स लेने से पहले आपको अपने हेल्थ प्रोफेशनल से बात करनी होगी क्योंकि इनमें से कुछ दवाएं अवसाद के लिए काम करती हैं और कुछ आपके अवसाद को बढ़ा सकती हैं।

डिप्रेशन के ऐसे मामले भी हैं, जहां दवा से ठीक नहीं होते हैं, इसलिए डॉक्टर एक अलग चिकित्सा का उपयोग करने की सलाह देते हैं, जैसे :

  • लेक्ट्रोकोनवल्सी थेरेपी (Electroconvulsive Therapy) – ECT
  • रेपेटिटिवे ट्रांस्क्रिनिअल स्टिमुलेशन (Repetitive Transcranial Magnetic Stimulation)- rTms

डिप्रेशन को कम करने का प्राकृतिक उपाय

कुछ लोग डिप्रेशन को कम करने के लिए हर्बल मेडिसिन, जड़ीबूटी जैसे प्राकृतिक उपचार अपना रहे हैं।

डिप्रेशन के इलाज के लिए प्राकृतिक उपचार एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है।

यहाँ कुछ सबसे लोकप्रिय जड़ीबूटी और पौधे हैं जिनका उपयोग अवसाद के इलाज के लिए किया जाता है।

1. हर्ब्स और सस्प्प्लिमेंट्स (Herbs & Supplements)

  • सेंट जॉन का पौधा (St. John’s wort)

एक शोध से पता चलता है कि सेंट. जॉन का पौधे को यूरोप में इस प्राकृतिक उपचार का उपयोग अवसादरोधी दवा के रूप में किया जाता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित रोगियों के लिए यह उचित उपचार नहीं है।

  • 5-हाइड्रॉक्सिट्रिप्टोफैन (5-hydroxytryptophan (5-HTP))

यह मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर में सेरोटोनिन हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है, जिससे मस्तिष्क शांत रहता है और अवसाद के लक्षण दूर हो जाते हैं।

  • जिनसेंग (Ginseng)

यह पारंपरिक दवा आपके मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करती है और साथ ही तनाव को भी कम करती है ।

  • एस-एडेनोसिल-एल-मेथियोनीन (S-adenosyl-L-methionine) – SAMe

हालांकि इस पर बहुत कम शोध हुआ है, लेकिन यह एक बहुत अच्छे पारंपरिक अवसादरोधी दवा के रूप में काम करता है।

यह आपके शरीर में एक प्राकृतिक रसायन का सिंथेटिक रूप है।

  • कैमोमाइल (Chamomile)

इसमें एक प्रकार का फ्लेवोनोइड होता है जो एक एंटीडिप्रेसेंट या अवसादरोधी के दवा रूप में कार्य करता है।

  • ओमेगा -3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acids)

यह फैटी एसिड मस्तिष्क में न्यूरोलॉजिकल विकास और मस्तिष्क स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।

अपने आहार में शामिल होने से आपके अवसाद के लक्षणों को कम करने की संभावना बढ़ सकती है ।

  • लैवेंडर (Lavender)

यह अवसाद, अनिद्रा के लक्षणों अदि को कम करने में मदद करता है

यह जरूरी है कि आप इन सभी हर्बल मेडिसिन, जड़ीबूटी और सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर से बात कर लें, क्योंकि इनमें से कुछ सप्लीमेंट्स का गलत इस्तेमाल आप पर बुरा असर पड़ सकता है।

2. भोजन और आहार

डिप्रेशन के असर को कम करने के लिए डाइट एक अच्छा भूमिका निभाती है ।

एक शोध से पता चला है कि इन सभी खाद्य पदार्थों को डाइट में लेने से डिप्रेशन के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

  • मछली
  • सब्जियां
  • फल

3. अत्याबश्यक तेल

जब प्राकृतिक चिकित्सा की बात आती है तो तेल को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता है, हालांकि इसका बहुत कम प्रभाव पड़ता है

डिप्रेशन के इलाज के लिए निम्न तेल का उपयोग किया जा सकता है:

जतुन तेल (Olive Oil) :- रोजाना की डाइट में इसका इस्तेमाल करने से डिप्रेशन में थोड़ी कमी आती है।

जंगली अदरक का तेल (Wild ginger oil) :- सांस में इसे अंदर लेने से दिमाग में सेरोटोनिन सक्रिय होता है, जिससे मूड अच्छा हो जाता है।

बरगामोट :-यह सर्जरी कराने वाले रोगी की मानसिक दुश्चिंता को कम करने में मदद करता है, उसी तरह यह उदास व्यक्ति के लिए भी उपयोगी हो सकता है

विटामिन :- शरीर के कई कार्यों के लिए विटामिन आवश्यक हैं। एक शोध से पता चला है कि मुख्य दो प्रकार के विटामिनों से अवसाद को कम किया जा सकता है।

  • विटामिन-बी :- मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए विटामिन बी12 और बी6 आवश्यक विटामिन हैं। शरीर में इसकी मात्रा कम होने से डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है
  • विटामिन-डी :- यह मस्तिष्क हृदय और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है। जो लोग डिप्रेशन में होते हैं उनमें विटामिन डी की कमी पाई गई है।

यह दावा किया जाता है कि कई जड़ी-बूटियाँ, पूरक और विटामिन अवसाद को कम करने में मदद करते हैं लेकिन यह अभी तक नैदानिक ​​शोध या क्लीनिकल रिसर्च में साबित नहीं हुआ है।

डिप्रेशन को कैसे रोका जा सकता है

डिप्रेशन इतनी आसानी से रोका नहीं जा सकता क्योंकि इसका पता लगाना मुश्किल है कि इसका मूल कारण क्या है।

अगर आपको लगातार बहत ज्यादा उदास महसूस होता हैं तो अच्छा है कि आप खुद को डिप्रेशन के आने वाले लक्षणों के लिए तैयार कर लें।

इसमें आपको एक अच्छी जीवनशैली और इलाज की जरूरत पड़ सकती है ।

कुछ तकनीकें जो आपकी मदद कर सकती हैं

  • पर्याप्त नींद लेना
  • तनाव मुक्त रहना
  • ठीक से इलाज करना
  • प्रतिदिन व्यायाम करना
  • अपने रिश्ते को बेहतर बनाना

एंग्जायटी और डिप्रेशन

एक व्यक्ति में एंग्जायटी और डिप्रेशन एक साथ प्रकट हो सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि 70% मामलों में अवसाद और चिंता के लक्षण एक साथ पाए जाते हैं।

इन्समे कुछ समान प्रकार के लक्ष्यण पाए जाते है जैसे :

  • चिड़चिड़ापन
  • नींद की समस्या
  • एकाग्रता और याददाश्त में हानि

जैसे इनके लक्षण एक जैसे होते हैं वैसे ही इनका इलाज जैसे थैरेपी, दवा आदि भी एक ही प्रकार का होते है ।

शराब और डिप्रेशन

एक शोध से पता चला है कि क्या शराब अवसाद को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाती है ।

शराब के अत्यधिक उपयोग या दुरुपयोग से अवसाद का खतरा बढ़ जाता है ।

एक शोध ने यह भी पाया है कि लगभग 63.8% शराबियों में डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी पायी जाती है।

डिप्रेशन के दौरान शराब का सेवन डिप्रेशन को और भी खराब कर सकता है और जो लोग शराबि हे उनमे यह खतरा बहत बढ़ जाता है ।

निष्कर्ष

डिप्रेशन अस्थायी हो सकता है या यह बहुत लंबे समय तक बना रह सकता है। उपचार सभी मामलों में अवसाद को समाप्त नहीं करता है।

उपचार लक्षणों को आपके नियंत्रण में लाता है। आपको डिप्रेशन के लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए अपने लिए सही दवा और उपचार खोजने की भी आवश्यकता होगी।

यदि एक प्रकार का उपचार आपके लिए काम नहीं करता है तो अपने हेल्थ केयर प्रोफेशनल से बात करें ।

वह आपको कई तरह के उपचार दे सकता है जो आपके डिप्रेशन के लक्ष्यण को कम करने लिए सबसे अच्छा काम कर सकता हैं।

Frequently Asked Questions (FAQ)
डिप्रेशन कैसे होता है?

डिप्रेशन आपके जीन के कारण हो सकता है और आसपास की स्थिति के वजह से हो सकता है। ड्रग्स और अल्कोहल का ज्यादा मात्रा में सेवन, अनिद्रा, पुरानी बीमारी या दर्द आदि शारीरिक स्थितियों के वजह से भी डिप्रेशन हो सकता है।

डिप्रेशन कब तक रहता है?

अलग अलग प्रकार के डिप्रेशन की अबधि भी अलग होते है | कुछ 2 हप्तो से लेकर 6 हप्ते तक रहते है और कुछ 2 साल से भी ज्यादा समाय तक रहते है | बाइपोलर डिप्रेशन जैसे बीमारी में लक्ष्यण लम्बे समय तक आते जाते रहते हैं |

डिप्रेशन के क्या क्या लक्षण है ?

दर्द,अत्यधिक नींद आना या रात को नींद न आना, पसंदीदा काम में बोरियत मेहसूस होना, आसानी से थकान महसूस करना, आत्महत्या के विचार आना, पाचन संबंधी समस्याएं, सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता,खाली या उदास महसूस करना, चिड़चिड़ापन, चिंतित या निराश होना अदि डिप्रेशन के मुख्य लक्ष्यण है |

डिप्रेशन को कैसे दूर करें?

साइकोथेरपि, एंटी-एंजायटी, एंटी-डिप्रेसेंट, एंटी-साइकॉटिक मेडिकेशन जैसे दवा का इस्तमाल,लाइट थेरेपी, शराब और नशीले पदार्थों जैसी चीजों सेदूर रहना और प्रतिदिन व्यायाम करने से डिप्रेशन से छुटकारा पाया जा सकता है।

डिप्रेशन का इलाज कितने महीने तक चलता है?

डिप्रेशन का इलाज करने से पहले यह पता लगाना जरूरी है कि आपको किस तरह का डिप्रेशन है। सामान्य डिप्रेशन का उपचार 2 सप्ताह से 6 महीने तक चल सकता है। अगर आप गंभीररूप से डिप्रेशन में पीड़ित हैं तो इसका इलाज सालों तक चल सकता है।

डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण क्या है?

अत्यधिक नींद आना या रात को नींद न आना, पसंदीदा काम में बोरियत मेहसूस होना, आसानी से थकान महसूस करना, आत्महत्या के विचार आना, पाचन संबंधी समस्याएं, सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता,खाली या उदास महसूस करना, चिड़चिड़ापन, चिंतित या निराश होना अदि डिप्रेशन के शुरुआती लक्ष्यण है |

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